December 1, 2025

अफगानिस्तान ने भारतीय निवेशकों को दिया सोने की खदानों व अन्य सेक्टर्स में बड़ा न्योता

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अफगानिस्तान ने भारतीय निवेशकों को दिया सोने की खदानों व अन्य सेक्टर्स में बड़ा न्योता

नई दिल्ली — सोमवार, 24 नवम्बर 2025: अफगानिस्तान के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Alhaj Nooruddin Azizi ने अपनी छह दिवसीय भारत यात्रा के समापन पर देश की खनिज संपदा एवं विकास-नीतियों को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा है कि वह उन भारतीय कंपनियों और निवेशकों का स्वागत करते हैं, जो अफगानिस्तान में “नए निवेश” करना चाहते हैं — खासकर सोने की खदानों (गोल्ड माइनिंग) में। इसके लिए काबुल सरकार 5 साल की टैक्स-छूट (tax exemption) देने को तैयार है।

टैक्स-छूट, टैरिफ में रियायत और जमीन की पेशकश

मंत्री अज़ीज़ी ने बताया कि जो कंपनियाँ नए सेक्टर्स — जैसे गोल्ड माइनिंग, कृषि, स्वास्थ्य, आईटी, ऊर्जा, कपड़ा आदि — में निवेश करेंगी, उन्हें पाँच साल तक टैक्स फ्री रहने का लाभ मिलेगा। इसके अलावा, उन कंपनियों को मशीनरी आयात के लिए सिर्फ 1 प्रतिशत टैरिफ देना पड़ेगा। साथ ही, काबुल सरकार उनकी इकाइयों के लिए जमीन का आवंटन करने को भी तैयार है। इससे निवेशकों की शुरुआती लागत काफी कम होगी।

अज़ीज़ी ने जोर देकर कहा कि अफगानिस्तान में प्रतिस्पर्धा कम है, इसलिए यह समय “पहले आने वालों” (first-mover) के लिए सुनहरा है। विशेष रूप से गोल्ड माइनिंग के लिए उन्होंने तकनीकी और पेशेवर कंपनियों को आमंत्रित किया — शुरुआत में सिर्फ रिसर्च और एक्सप्लोरेशन टीम भेजने की सलाह दी गई है। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि खनिज निकासी के बाद उसे processing (प्रसंस्करण) अफगानिस्तान के भीतर ही करना होगा, ताकि स्थानीय रोजगार उत्पन्न हो।

द्विपक्षीय व्यापार एवं कनेक्टिविटी सुधारने की पहल

इस निवेश प्रस्ताव के अलावा, अफगानिस्तान और भारत ने अपने व्यावसायिक रिश्तों को मजबूत करने का ऐलान किया है। दोनों देशों ने सहमति जताई है कि वे एक संयुक्त वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (Joint Commerce & Industry Council) को फिर सक्रिय करेंगे। इसके तहत एक वाणिज्यिक अटैची को भारत भेजने का निर्णय लिया गया है।

अज़ीज़ी ने यह भी कहा कि कुछ “छोटे लेकिन महत्वपूर्ण” अड़चनें — जैसे वीजा, एयर-कारिडोर (हवाई मंडल), बैंकिंग लेन-देन — अभी रुकावट पैदा कर रही हैं। उन्होंने दोनों पक्षों से कहा कि इन मुद्दों को तुरंत हल किया जाए, ताकि निवेश का मार्ग सुचारु हो।

अफगानिस्तान क्यों – और क्या जोखिम है?

अज़ीज़ी की दलील है कि अफगानिस्तान में संसाधन काफी हैं, लेकिन अभी उन्हें बड़े पैमाने पर एक्सप्लोर नहीं किया गया है। इसलिए वहाँ प्रतिस्पर्धा कम है, जिससे भारतीय निवेशकों को बाजार में हिस्सा पाने का बड़ा मौका है। इसके अतिरिक्त, टैक्स-छूट व टैरिफ रियायत जैसे प्रोत्साहन लागत को कम करते हैं।

हालाँकि, ऐसे निवेशों में देश की स्थिरता, सुरक्षा, कानूनी व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्थानीय processing और लॉजिस्टिक सुविधाएँ — सब महत्त्वपूर्ण होंगे। अभी यह साफ नहीं है कि इन चुनौतियों को कितनी तेजी से हल किया जा सकेगा।

इस प्रस्ताव का मतलब — भारत के लिए क्या?

  • यह प्रस्ताव भारतीय खनन, माइनिंग, टेक्नोलॉजी या अन्य संसाधन-संबंधित कंपनियों के लिए अवसर पैदा करता है — विशेषकर वे कंपनियाँ जो भू-संसाधन या खनिज क्षेत्र में रुचि रखती हैं।

  • पाँच साल की टैक्स-छूट और कम टैरिफ जैसी सुविधाओं से शुरुआती खर्च कम होगा, जिससे जोखिम कम और निवेश आकर्षक बनेगा।

  • अगर भारत-अफगानिस्तान के बीच वाणिज्यिक व कनेक्टिविटी बाधाओं (वीजा, फ्रेट कॉरिडोर, बैंकिंग) को हल किया गया, तो दोनों देशों का व्यापार लाभ उठा सकता है।

  • अफगानिस्तान खुलने लगा है — भारत के लिए यह अवसर हो सकता है कि वह पहले कदम लेकर वहाँ अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित करे, खासकर भू-संसाधन और निर्माण व टेक्नोलॉजी क्षेत्र में।

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