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लखीमपुर खीरी के मध्य स्थित संकटा माता मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और संस्कृति का अद्भुत संगम है। यह मंदिर न सिर्फ पौराणिक महत्व रखता है, बल्कि उन तीन प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, जिनकी स्थापना स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने की थी।
🌺 स्थापना की पौराणिक कथा
मान्यता है कि महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद जब भगवान श्रीकृष्ण अपने शौर्य, धर्म और नीति के महान कार्यों को पूर्ण कर नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मंदिर की यात्रा पर जा रहे थे, तब वे अपने साथ रुक्मिणी देवी के साथ इस क्षेत्र से होकर गुज़रे।
यह क्षेत्र उस समय घने जंगलों और विशाल वृक्षों से आच्छादित था — नदियों और झीलों से घिरा शांत, पवित्र स्थल। रुक्मिणी ने इस सुंदर स्थान को देखकर यहाँ पूजा-अर्चना की इच्छा प्रकट की। उनकी यह इच्छा पूरी करने हेतु भगवान श्रीकृष्ण ने एक विशाल जलाशय के तट पर तीन देवियों – माता लक्ष्मी, माता सरस्वती और माता दुर्गा – की प्रतिमाओं की स्थापना की।
समय बीतने के साथ यह क्षेत्र तीनों शक्तियों का संगमस्थल बन गया। माता लक्ष्मी, जो संकटों को दूर करने वाली शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित हुईं, आगे चलकर “संकटा देवी” के नाम से विख्यात हुईं।
🌾 लक्ष्मीपुर से लखीमपुर तक
आचार्य हरीश शास्त्री ने बताया माता लक्ष्मी की स्थापना के कारण इस स्थान का नाम पहले “लक्ष्मीपुर” रखा गया था। समय के प्रवाह और लोकभाषा के परिवर्तनों के साथ यह नाम “लखीमपुर” में परिवर्तित हो गया। यही आज का लखीमपुर खीरी जिला है।
इस मंदिर को शहर की कुलदेवी के रूप में भी पूजा जाता है। यहां की जन-जन की आस्था संकटा माता में गहराई से रची-बसी है। विवाह, नवग्रह पूजन, संतान प्राप्ति या संकट निवारण – हर शुभ कार्य की शुरुआत माता के चरणों में नमन से होती है।
🛕 मंदिर की भव्यता और वातावरण
संकटा माता मंदिर रेलवे स्टेशन से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। मंदिर का स्थापत्य अत्यंत भव्य है — ऊँचा विशालकाय गुंबद, चारों ओर फैले हरे-भरे वृक्षों के झुरमुट, और मंदिर परिसर में गूंजते मंत्रोच्चार का वातावरण मन को अद्भुत शांति प्रदान करता है।
भक्तों का कहना है कि मंदिर की परिधि में प्रवेश करते ही एक अलग ऊर्जा और शांति का अनुभव होता है। घंटियों की मधुर ध्वनि, दीपों की लौ और भक्तों की आस्था इस स्थान को एक जीवंत शक्तिपीठ में परिवर्तित कर देती है।
🌕 श्रद्धा और परंपरा
हर वर्ष नवरात्रि, दीपावली, और गुरुवार के विशेष दिन यहाँ भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। विशेष रूप से चैत्र और अश्विन नवरात्र में मंदिर का वातावरण दिव्यता से भर उठता है। भक्त दिन-रात माता के जयकारे लगाते हैं, अखण्ड ज्योति प्रज्वलित की जाती है, और श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए माता के चरणों में सिर नवाते हैं।
🌸 संकटा माता – संकटों से मुक्ति देने वाली
भक्तों की अटूट आस्था है कि जो कोई सच्चे मन से माता संकटा से प्रार्थना करता है, उसके जीवन के सभी कष्ट, दुख और बाधाएँ दूर हो जाती हैं। माता अपने भक्तों के सभी संकट हर लेती हैं, इसीलिए उन्हें “संकटा हरिणी” और “संकट मोचनी” कहा जाता है।
🌼 निष्कर्ष
लखीमपुर खीरी का संकटा माता मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह शहर के इतिहास और पहचान का प्रतीक भी है। भगवान श्रीकृष्ण की स्थापित की हुई यह शक्ति आज भी लाखों भक्तों के जीवन में आशा, आस्था और साहस का संचार करती है।
जब भी कोई लखीमपुर आता है, तो बिना संकटा माता के दर्शन किए उसकी यात्रा अधूरी मानी जाती है। माता का यह पवित्र स्थान आज भी यह संदेश देता है —
“संकट चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, माता संकटा की कृपा से सब संभव है।” 🙏
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