December 1, 2025

संविधान दिवस पर युवराज दत्त महाविद्यालय में राष्ट्रीय वेबिनार और प्रस्तावना पाठ के साथ जागरूकता का संदेश

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लखीमपुर-खीरी। युवराज दत्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय, लखीमपुर-खीरी में 26 नवम्बर को संविधान दिवस बड़े उत्साह और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में छात्र-छात्राओं को न केवल भारतीय संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ कराया गया, बल्कि उन्हें संविधान के आदर्शों, मूल्यों और नागरिक कर्तव्यों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने हेतु प्रेरित भी किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. हेमन्त पाल के दिशा-निर्देशन में हुई। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि देश के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का जीवंत मार्गदर्शक है, जो भारत की विविधता, एकता और लोकतांत्रिक परंपराओं को प्रतिबिंबित करता है।

दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. सुभाष चन्द्रा ने छात्रों को संविधान की प्रस्तावना का पाठ कराया और उन्हें संविधान में निहित मूल्यों—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व—को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी यदि संविधान की मूल भावना को समझकर आगे बढ़ेगी, तो राष्ट्र मजबूत और समृद्ध बनेगा। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे नागरिक दायित्वों के प्रति सजग रहें और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन

संविधान दिवस के उपलक्ष्य में युवराज दत्त महाविद्यालय एवं सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोसाइटी एंड पॉलिटिक्स (CSSP) कानपुर के संयुक्त तत्वावधान में एक राष्ट्रीय वेबिनार का भी आयोजन किया गया। वेबिनार का केंद्रीय विषय था—
“भारतीय संविधान की मूल भावना, आदर्श और 75 वर्षों की संवैधानिक यात्रा।”

वेबिनार में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने भाग लिया।

मुख्य वक्ताओं के सारगर्भित संबोधन

मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. विजय कुमार वर्मा, राजनीति विज्ञान विभाग, दयाल सिंह कॉलेज, नई दिल्ली, तथा प्रो. सरोज कुमार वर्मा, पूर्व संकाय अध्यक्ष, समाज विज्ञान संकाय, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा ने संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उसके विकास, मूल संरचना तथा 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पर विस्तृत व्याख्यान दिया।
वक्ताओं ने संविधान को समय की कसौटी पर खरा उतरने वाला सर्वोत्तम लोकतांत्रिक दस्तावेज बताया और कहा कि भारत की ताकत इसकी संवैधानिक विविधता और नागरिकों की चेतना में निहित है।

विशिष्टजनों की उपस्थिति और विचार

वेबिनार में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. हेमन्त पाल, निदेशक सीएसएसपी कानपुर प्रो. ए.के. वर्मा, प्रो. जितेन्द्र नारायण (एल.एन. मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा), डॉ. धर्मेन्द्र सिंह श्रीवास्तव, अकैडमिक निदेशक, सीएसएसपी कानपुर तथा प्रो. संजय कुमार, विभागाध्यक्ष राजनीति विज्ञान, युवराज दत्त महाविद्यालय ने भी अपने विचार साझा किए।
इन सभी शिक्षाविदों ने संविधान की प्रासंगिकता, लोकतंत्र को मजबूत बनाने में उसकी भूमिका तथा युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला।

छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की। युवाओं ने संविधान दिवस को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना और अपने अधिकारों व कर्तव्यों की याद दिलाने वाला महत्वपूर्ण अवसर बताया।

कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन किया गया और सभी प्रतिभागियों को संविधान के प्रति आस्था, समर्पण और नागरिक जिम्मेदारी निभाने का संकल्प दिलाया गया।

संविधान दिवस के इस आयोजन ने सिद्ध किया कि युवा पीढ़ी यदि संवैधानिक मूल्यों को आत्मसात कर आगे बढ़े, तो राष्ट्र का भविष्य निश्चित ही उज्ज्वल और सशक्त होगा।

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