December 1, 2025

सेठ घाट पर झिलमिलाए दीप: खीरी में आस्था, संस्कृति और एकता का अद्भुत संगम

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सेठ घाट पर झिलमिलाए दीप: खीरी में आस्था, संस्कृति और एकता का अद्भुत संगम

लखीमपुर खीरी, 05 नवंबर।
बुधवार की शाम जब सूर्य ने पश्चिम की ओर अपनी अंतिम किरणें बिखेरीं, तभी लखीमपुर खीरी का ऐतिहासिक सेठ घाट आस्था और संस्कृति के उजास में नहा उठा। हजारों दीपों की टिमटिमाती लौ ने ऐसा नज़ारा पेश किया मानो धरती पर साक्षात् स्वर्ग उतर आया हो। देव दीपावली के इस पावन अवसर पर जनसैलाब उमड़ा, श्रद्धा की लहरों में शहर बह निकला, और हर ओर गूंज उठी—“हर हर महादेव” और “भारत माता की जय” की गूंज।

इस भव्य आयोजन की शुरुआत विधायक सदर योगेश वर्मा, जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल, और पुलिस अधीक्षक संकल्प शर्मा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर की। जैसे ही पहला दीप जला, वैसे ही पूरा घाट एक साथ जगमगा उठा—जल में झिलमिलाते दीपों की परछाई मानो चंद्रमा के हजारों टुकड़ों सी लग रही थी।

इसके बाद हुई भारत माता की भव्य आरती, जिसमें जनप्रतिनिधियों, नगरवासियों, और भाजपा कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में “वंदे मातरम्” और “भारत माता की जय” का जयघोष किया। वातावरण में बजते भक्ति गीत, मंत्रोच्चारण और शंखनाद ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक बना दिया।

विधायक योगेश वर्मा ने अपने संबोधन में कहा,

“देव दीपावली का पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत और आस्था का प्रतीक है। जिस तरह आज सेठ घाट पर दीपों का सागर उमड़ा है, उसी तरह लखीमपुर खीरी भी उजाले, समृद्धि और सौहार्द्र से आलोकित हो।”

जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने जनपदवासियों को देव दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि—

“यह पर्व केवल प्रकाश का नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच, एकता और समृद्धि का संदेश देने वाला है। आइए, हम सब मिलकर इस रोशनी को अपने दिलों में जलाए रखें।”

वहीं एसपी संकल्प शर्मा ने कहा—

“देव दीपावली हमें यह सिखाती है कि अच्छाई और एकता का दीप जब जलता है, तो अंधकार अपने आप मिट जाता है। आज सेठ घाट पर यही दृश्य देखने को मिला है।”

जैसे-जैसे रात गहराती गई, घाट की शोभा बढ़ती चली गई। दीपों की कतारें गंगा आरती के सुरों के साथ लहरों पर नाचती रहीं। बच्चे दीप बहा रहे थे, महिलाएं आरती की थालियों में दीप सजा रही थीं, और युवाओं की टोली मोबाइल कैमरों में इस दिव्य क्षण को कैद कर रही थी।

पूरा घाट सुनहरी रोशनी से नहाया हुआ था। कहीं दीपदान हो रहा था, कहीं भजन कीर्तन की धुनें वातावरण में गूंज रहीं थीं। जलती हुई लौ के साथ लोगों ने अपने मन की कामनाएं मांगीं—घर में सुख, समाज में शांति, और देश में समृद्धि की।

देव दीपावली पर इस वर्ष का आयोजन खीरी के लिए वाकई अविस्मरणीय बन गया। प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था, नगरवासियों की उत्साही भागीदारी, और गंगा तट की प्राकृतिक सुंदरता—सबने मिलकर ऐसा नज़ारा रचा कि जिसने भी देखा, वही मंत्रमुग्ध हो उठा।

सेठ घाट पर इस शाम केवल दीप नहीं जले—उम्मीदें जलीं, संस्कार जले, और एक नए उजाले की शुरुआत हुई।

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