June 3, 2026

“बहराइच में पत्रकारों पर फर्जी मुकदमों के विरोध में लखीमपुर के पत्रकारों का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन”

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लखीमपुर खीरी। बहराइच में पत्रकारों पर फर्जी तरीके से मुकदमा दर्ज किए जाने के विरोध में  लखीमपुर खीरी के पत्रकारों में भारी आक्रोश देखने को मिला। यूपीडब्ल्यूजेयू एवं लखीमपुर प्रेस क्लब के संयुक्त नेतृत्व में पत्रकारों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी खीरी को सौंपते हुए पत्रकारों पर दर्ज मुकदमे तत्काल वापस लेने की मांग की। इस दौरान पत्रकारों ने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दबाने का कोई भी प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

विरोध प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों ने कहा कि बहराइच में नगर पालिका के अंदर फैले भ्रष्टाचार की खबरें प्रकाशित और प्रसारित करना पत्रकारों का कर्तव्य था। लेकिन सच्चाई उजागर होने से बौखलाए अधिकारियों ने पत्रकारों को डराने और दबाने के लिए उन पर फर्जी मुकदमे दर्ज करा दिए। पत्रकारों का आरोप है कि जिलाधिकारी कार्यालय बुलाकर फेसबुक से खबर हटवाने का दबाव बनाया गया, जो सीधे तौर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की आजादी पर हमला है। इसके बाद भी पत्रकारों को झूठे मुकदमों में फंसाया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।

यूपीडब्ल्यूजेयू के जिलाध्यक्ष कुलदीप पाहवा ने कहा कि पत्रकार समाज का आईना होता है। यदि पत्रकार भ्रष्टाचार और जनसमस्याओं की खबरें नहीं दिखाएंगे तो आम जनता की आवाज कौन उठाएगा। उन्होंने कहा कि बहराइच प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई यह दर्शाती है कि सच्चाई उजागर करने वालों को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि पत्रकारों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो संगठन सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगा और इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

यूनियन के महामंत्री शबाब खान ने कहा कि पत्रकारों पर इस प्रकार की कार्रवाई लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। उन्होंने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, न कि उन्हें प्रताड़ित किया जाए। उन्होंने कहा कि पत्रकार निष्पक्ष होकर समाज और सरकार के बीच एक सेतु का काम करते हैं। यदि पत्रकारों को ही डराया जाएगा तो लोकतंत्र कमजोर होगा।

ज्ञापन सौंपने पहुंचे पत्रकारों ने काली पट्टी बांधकर प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी भी की। इस दौरान “पत्रकार एकता जिंदाबाद”, “फर्जी मुकदमे वापस लो” और “लोकतंत्र की आवाज दबाना बंद करो” जैसे नारों से माहौल गूंज उठा। प्रदर्शन में शामिल पत्रकारों ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ बहराइच के पत्रकारों की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के पत्रकार समाज की लड़ाई है। यदि आज आवाज नहीं उठाई गई तो भविष्य में किसी भी पत्रकार को सच दिखाने की कीमत चुकानी पड़ सकती है।

पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और पत्रकारों पर दर्ज मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं। साथ ही उन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सख्त कदम उठाने की भी मांग की।

ज्ञापन सौंपने वालों में यूपीडब्ल्यूजेयू के जिलाध्यक्ष कुलदीप पाहवा, महामंत्री शबाब खान, रितेश भसीन, शकील अहमद, बीके सिंह, अनूप रंजन मुखर्जी, शुभम त्रिपाठी, धीरज कुमार सहित बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि पत्रकारों की आवाज दबाने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

इस विरोध प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया कि पत्रकार समाज अब अपनी एकता और अधिकारों को लेकर पहले से अधिक सजग हो चुका है। पत्रकारों का कहना है कि निष्पक्ष पत्रकारिता को दबाने की कोशिशें कभी सफल नहीं होंगी और सच की आवाज हमेशा बुलंद रहेगी।

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