*सीतापुर के दंडपुरवा में मौत का बेसमेंट! अवैध अस्पताल में चल रहा जिंदगी से खिलवाड़, स्वास्थ्य विभाग बना तमाशबीन*
*सीतापुर के दंडपुरवा में मौत का बेसमेंट! अवैध अस्पताल में चल रहा जिंदगी से खिलवाड़, स्वास्थ्य विभाग बना तमाशबीन*
सीतापुर।
उत्तर प्रदेश के जनपद सीतापुर में दंडपुरवा गांव, जो लखीमपुर के नकहा से सिसैया रोड पर स्थित है, वहां पेट्रोल पंप के सामने बेसमेंट में एक कथित अवैध अस्पताल धड़ल्ले से संचालित हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि यहां लोगों की जिंदगी से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग अब तक आंखें मूंदे बैठा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस अवैध अस्पताल की शिकायत करीब एक माह पहले संबंधित नोडल अधिकारी को दी जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। सवाल यह उठता है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग किस बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या किसी की जान जाने के बाद ही विभाग की नींद खुलेगी?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल के बाहर न तो कोई बोर्ड लगा है और न ही किसी प्रकार का रजिस्ट्रेशन दिखाई देता है। इसके बावजूद अस्पताल के अंदर कुछ अनट्रेंड लड़के मरीजों का इलाज करते नजर आते हैं। सूत्रों की मानें तो ये युवक बिना मेडिकल डिग्री के मरीजों को ड्रिप चढ़ा रहे हैं, इंजेक्शन लगा रहे हैं और भर्ती तक कर रहे हैं।


इतना ही नहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां छोटे-मोटे ऑपरेशन तक किए जाते हैं। अगर यह सच है तो यह सीधे तौर पर लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है। बिना प्रशिक्षित लोगों द्वारा इलाज किए जाने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
हर महीने अस्पतालों के निरीक्षण का नियम केवल कागजों तक सीमित दिखाई देता है। सवाल यह भी खड़ा होता है कि जब क्षेत्र में इतने लंबे समय से यह अस्पताल संचालित हो रहा है, तो आखिर अधिकारियों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी? या फिर सब कुछ देखकर भी अनदेखा किया जा रहा है?
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि आखिर इस अवैध अस्पताल पर कार्रवाई करने से स्वास्थ्य विभाग कतरा क्यों रहा है? क्या इसके पीछे कोई मोटा चढ़ावा काम कर रहा है? क्या विभागीय मिलीभगत के कारण यह अस्पताल बेखौफ तरीके से चल रहा है?
यदि समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले समय में कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों की होगी।
अब देखने वाली बात यह होगी कि नोडल अधिकारी और सीतापुर स्वास्थ्य विभाग कब जागते हैं और इस अवैध अस्पताल पर कार्रवाई करते हैं, या फिर यूं ही लोगों की जिंदगी खतरे में डालकर यह खेल चलता रहेगा।