दिल्ली | पश्चिम एशिया संकट पर ट्रंप-मोदी की अहम बातचीत, शांति बहाली पर जोर
Vivek Gupta March 24, 2026 0
दिल्ली | पश्चिम एशिया संकट पर ट्रंप-मोदी की अहम बातचीत, शांति बहाली पर जोर
पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी परिप्रेक्ष्य में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi को फोन कर क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में जारी घटनाक्रम न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक शांति और अर्थव्यवस्था के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।

जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच हुई इस बातचीत में सुरक्षा हालात, ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और वैश्विक व्यापार पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत हमेशा से शांति, स्थिरता और संवाद के पक्ष में रहा है और वर्तमान परिस्थितियों में भी भारत तनाव कम करने तथा जल्द से जल्द शांति बहाली का समर्थन करता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से Hormuz Strait (होर्मुज जलडमरूमध्य) के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल की आपूर्ति होती है। ऐसे में इसका खुला, सुरक्षित और निर्बाध बने रहना पूरी दुनिया के हित में है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मार्ग में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है, तो इसका असर न केवल तेल की कीमतों पर पड़ेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होगी।
बातचीत के दौरान Donald Trump और Narendra Modi ने इस बात पर भी सहमति जताई कि मौजूदा संकट के समाधान के लिए सभी देशों को संयम और संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी प्रकार का सैन्य टकराव स्थिति को और अधिक जटिल बना सकता है, इसलिए कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए आपसी सहयोग को और मजबूत करने पर भी चर्चा की। उन्होंने यह भी तय किया कि भविष्य में भी वे इस मुद्दे पर लगातार संपर्क में रहेंगे और जरूरत पड़ने पर समन्वित प्रयास करेंगे। यह सहमति इस बात का संकेत है कि भारत और अमेरिका वैश्विक शांति के मुद्दों पर मिलकर काम करने के इच्छुक हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की भूमिका इस पूरे संकट में बेहद महत्वपूर्ण है। भारत एक ओर जहां पश्चिम एशिया से अपने ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा प्राप्त करता है, वहीं दूसरी ओर उसके इस क्षेत्र के कई देशों के साथ मजबूत आर्थिक और सामरिक संबंध भी हैं। ऐसे में भारत की प्राथमिकता स्पष्ट रूप से क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और किसी भी प्रकार के बड़े संघर्ष को टालने की है।
भारत की “संतुलित कूटनीति” भी इस संदर्भ में उल्लेखनीय है। भारत ने हमेशा सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने और किसी एक पक्ष के साथ पूर्ण रूप से न जुड़ने की नीति अपनाई है। यही कारण है कि भारत को एक विश्वसनीय और संतुलित मध्यस्थ के रूप में भी देखा जाता है। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से शांति और संवाद पर दिया गया जोर इसी नीति को दर्शाता है।
वहीं, अमेरिका की भूमिका भी इस संकट में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Donald Trump के नेतृत्व में अमेरिका ने हमेशा पश्चिम एशिया में अपनी रणनीतिक उपस्थिति बनाए रखी है। ऐसे में भारत और अमेरिका के बीच इस तरह की उच्च स्तरीय बातचीत यह संकेत देती है कि दोनों देश क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर मिलकर काम करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ेगा। तेल की कीमतों में उछाल, आपूर्ति श्रृंखला में बाधा और समुद्री व्यापार में जोखिम जैसी समस्याएं उभर सकती हैं। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।
कुल मिलाकर, Donald Trump और Narendra Modi के बीच हुई यह बातचीत वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह न केवल दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि विश्व के प्रमुख देश पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए गंभीर प्रयास कर रहे हैं।
आने वाले दिनों में इस संकट की दिशा और इसमें वैश्विक शक्तियों की भूमिका अंतरराष्ट्रीय राजनीति की तस्वीर को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है। ऐसे में सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कूटनीतिक प्रयास कितने सफल होते हैं और क्या दुनिया एक बड़े संकट से बच पाती है।