June 3, 2026

संभावित बाढ़ को लेकर प्रशासन अलर्ट, डीएम अंजनी कुमार सिंह ने अफसरों को दिए सख्त निर्देश

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बाढ़ चौकियों, राहत शिविरों, तटबंधों और संचार व्यवस्था को समय से दुरुस्त करने के निर्देश, NDRF-SDRF की तैनाती की तैयारी तेज

लखीमपुर-खीरी। मानसून से पहले संभावित बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। जिले में बाढ़ की आशंका को देखते हुए जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने मंगलवार देर शाम कलेक्ट्रेट सभागार में द्वितीय जिलास्तरीय बाढ़ स्टीयरिंग ग्रुप की महत्वपूर्ण बैठक कर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। बैठक में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की तैयारियों, राहत कार्यों, तटबंधों की सुरक्षा, संचार व्यवस्था और बचाव योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान डीएम अंजनी कुमार सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि बाढ़ जैसी आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ मजबूत और कारगर कार्ययोजना तैयार करनी होगी। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हर विभाग को अपनी जिम्मेदारी तय समय के भीतर पूरी करनी होगी। बैठक का संचालन अपर जिलाधिकारी नरेंद्र बहादुर सिंह ने किया।

संवेदनशील गांवों की होगी विशेष मैपिंग

डीएम ने अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड तथा लखीमपुर, निघासन, धौरहरा, गोला और पलिया के एसडीएम को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में संभावित बाढ़ प्रभावित गांवों, ब्लॉकों और तहसीलों की सटीक पहचान करें। उन्होंने कहा कि समान परिस्थितियों वाले गांवों को सेक्टर और जोन के रूप में चिन्हित कर क्लस्टर तैयार किए जाएं, ताकि जरूरत पड़ने पर राहत और बचाव कार्य तेजी से संचालित किए जा सकें।

उन्होंने विस्तृत नक्शा तैयार करने के निर्देश देते हुए कहा कि बाढ़ के दौरान किस क्षेत्र में पहले राहत पहुंचानी है और कहां से सुरक्षित निकासी करनी है, इसकी स्पष्ट योजना पहले से तैयार रहनी चाहिए।

राहत शिविर और वैकल्पिक मार्गों की बनेगी मजबूत योजना

संभावित बाढ़ के दौरान संपर्क मार्ग बाधित होने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने प्रत्येक गांव के लिए वैकल्पिक रास्तों की योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नेटवर्क फेल होने की स्थिति में भी राहत कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए हाईटेक संचार योजना पर काम शुरू कर दिया गया है।

बैठक में तय किया गया कि प्रत्येक राहत शिविर का संचालन बहु-विभागीय टीम करेगी। स्वास्थ्य विभाग को राहत शिविरों में आवश्यक दवाओं, एंटी स्नेक वेनम, टीकाकरण और अन्य चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

NDRF-SDRF की तैनाती के लिए विशेष तैयारी

डीएम ने निर्देश दिए कि बाढ़ राहत कार्यों के लिए PAC, SDRF और NDRF की टीमों की तैनाती हेतु चयनित स्थानों पर सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि इन स्थानों पर शुद्ध पेयजल, बिजली, शौचालय, मोबाइल और वायरलेस नेटवर्क तथा वाहनों के सुचारु आवागमन की मुकम्मल व्यवस्था होनी चाहिए।

प्रशासन का मानना है कि आपदा के समय राहत बलों की त्वरित कार्रवाई से जनहानि और नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

तटबंधों की मरम्मत और नालों की सफाई के निर्देश

डीएम ने सिंचाई विभाग को चेतावनी देते हुए कहा कि मानसून शुरू होने से पहले सभी तटबंधों और बांधों की मरम्मत तथा सुदृढ़ीकरण कार्य हर हाल में पूरा कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि अत्यधिक जल दबाव की स्थिति में तटबंध टूटने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए आपातकालीन सामग्री और संसाधन पहले से तैयार रखें जाएं।

वहीं नगर निकायों के अधिकारियों को शहर के बड़े नालों की सफाई समय से कराने और जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए पंपिंग व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए।

पशुओं की सुरक्षा पर भी विशेष फोकस

सीडीओ अभिषेक कुमार ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में केवल लोगों की ही नहीं, बल्कि मवेशियों की सुरक्षा भी प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने बीडीओ को निर्देश दिए कि संवेदनशील गौशालाओं को चिन्हित कर गोवंशों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने की कार्ययोजना तैयार करें।

इसके अलावा पशुओं के लिए चारे, टीकाकरण और अस्थायी पशु शिविरों की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने को कहा गया।

स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल टीमें रहेंगी सक्रिय

सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि संवेदनशील बाढ़ क्षेत्रों के लिए मोबाइल मेडिकल टीमों का गठन कर दिया गया है। बाढ़ चौकियों पर स्वास्थ्य कर्मियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। उन्होंने कहा कि राहत शिविरों और चिकित्सा कैंपों में ओआरएस, क्लोरीन की गोलियां, सेनेटरी नैपकिन और जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।

बैठक में अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड अजय कुमार ने पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से पिछले वर्षों के जलस्तर, नदी डिस्चार्ज, तटबंध मरम्मत और कटाव रोधी कार्यों की जानकारी दी।

बैठक के अंत में डीएम ने जिला आपदा नियंत्रण कक्ष के टोल फ्री नंबर 1077 को पूरी तरह सक्रिय रखने, मल्लाहों और गोताखोरों की सूची अपडेट करने तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत व्यवस्था समय से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रशासन की इस सक्रियता से साफ है कि जिले में संभावित बाढ़ से निपटने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

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