June 4, 2026

मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, पात्रों को हर हाल में मिले लाभ : डीएम अंजनी कुमार सिंह

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कलेक्ट्रेट में हुई समीक्षा बैठक, तहसीलवार दावों की गहन जांच; लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण के निर्देश

लखीमपुर खीरी। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत पात्र किसानों और खेतिहर मजदूरों के परिवारों को समय से लाभ दिलाने को लेकर जिला प्रशासन अब पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट स्थित कार्यालय कक्ष में जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने योजना की प्रगति और लंबित दावों की विस्तृत समीक्षा बैठक कर अधिकारियों को दो टूक चेतावनी दी कि योजना में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि दुर्घटना में जान गंवाने वाले किसानों और खेतिहर मजदूरों के आश्रितों को शासन की इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ हर हाल में मिलना चाहिए।

बैठक में सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता, अपर जिलाधिकारी नरेंद्र बहादुर सिंह, एसडीएम अश्विनी कुमार सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे, जबकि कई तहसीलों के एसडीएम वर्चुअल माध्यम से जुड़े। बैठक के दौरान डीएम ने तहसीलवार प्राप्त दावों, उनके निस्तारण और लंबित मामलों की गहन समीक्षा की।

समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों से सीधे सवाल-जवाब करते हुए कई मामलों की जानकारी ली और यह जानने का प्रयास किया कि किन कारणों से कुछ दावे लंबित हैं। उन्होंने साफ कहा कि मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए सहारा है जिनके घर का कमाने वाला सदस्य दुर्घटना का शिकार हो जाता है। ऐसे परिवार आर्थिक संकट से गुजरते हैं, इसलिए प्रशासन की जिम्मेदारी है कि उन्हें समय से सहायता उपलब्ध कराई जाए।

डीएम अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों और खेतिहर मजदूरों के हितों को लेकर बेहद गंभीर है। यही कारण है कि इस योजना के माध्यम से दुर्घटना में मृत्यु होने पर आश्रित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी पात्र परिवार को कागजी औपचारिकताओं या लापरवाही के कारण योजना के लाभ से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।

उन्होंने सभी एसडीएम को निर्देश दिए कि तहसील स्तर पर प्राप्त दावों की नियमित मॉनिटरिंग करें और लंबित प्रकरणों का तेजी से निस्तारण सुनिश्चित करें। डीएम ने यह भी कहा कि यदि किसी स्तर पर अनावश्यक देरी या लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जाए।

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी के अभाव में पात्र परिवार समय से आवेदन नहीं कर पाते। इस पर डीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्राम स्तर पर जागरूकता बढ़ाई जाए और राजस्व विभाग के कर्मचारी गांवों में जाकर लोगों को योजना के बारे में जानकारी दें। उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों तक राहत पहुंचाना है, इसलिए प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ कार्य करना होगा।

डीएम ने तहसील से प्राप्त रिपोर्टों की विस्तार से समीक्षा करते हुए कहा कि प्रत्येक मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और पात्रता संबंधी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए। उन्होंने कहा कि कई बार तकनीकी कारणों से फाइलें लंबित रह जाती हैं, लेकिन ऐसी स्थिति में अधिकारियों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

बैठक में मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि योजना के अंतर्गत प्राप्त दावों का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखा जाए और समय-समय पर उसकी समीक्षा की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि आवेदन प्रक्रिया सरल और सुगम बनी रहे, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग बिना किसी परेशानी के योजना का लाभ प्राप्त कर सकें।

सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता ने भी बैठक में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका को लेकर जानकारी दी और कहा कि दुर्घटना संबंधी मामलों में आवश्यक मेडिकल रिपोर्ट और दस्तावेज समय से उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि दावों के निस्तारण में अनावश्यक देरी न हो।

बैठक के दौरान डीएम का रुख पूरी तरह सख्त और संवेदनशील दोनों नजर आया। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि गरीब किसानों और खेतिहर मजदूरों के हितों से जुड़ी योजनाओं में किसी भी प्रकार की उदासीनता अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य यही है कि हर पात्र परिवार तक शासन की मदद समय से पहुंचे और उन्हें आर्थिक संकट के समय सहारा मिल सके।

जिलाधिकारी के इस सख्त रुख से साफ है कि जिले में मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रशासन अब पूरी गंभीरता के साथ कार्य कर रहा है।

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