क्या पूजा को मिलेगा न्याय? या फिर फाइलों में दब जाएगी एक बेटी की पुकार ! दहेज लोभियों पर कब होगी कार्रवाई
सम्पूर्णानगर/लखीमपुर खीरी
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में एक बार फिर दहेज उत्पीड़न का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने समाज के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सिर्फ एक बेटी के साथ हुए कथित अत्याचार का नहीं है, सवाल यह है कि क्या आज भी बेटियां दहेज की भेंट चढ़ रही हैं? क्या समझौते और आश्वासनों के बाद भी दहेज लोभी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे? और सबसे बड़ा सवाल… क्या पूजा को न्याय मिलेगा?
13 फरवरी 2024…
एक पिता ने अपनी बेटी पूजा की शादी बड़े अरमानों और उम्मीदों के साथ सम्पूर्णानगर निवासी रंजीत गुप्ता उर्फ हैप्पी के साथ की। परिवार को उम्मीद थी कि बेटी का जीवन खुशियों से भर जाएगा। लेकिन आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही खुशियों की जगह प्रताड़ना ने ले ली।
पीड़िता के पिता राजेश कुमार गुप्ता का आरोप है कि ससुराल पक्ष ने अतिरिक्त दहेज की मांग शुरू कर दी। बेटी को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। हर दिन नए ताने, नए आरोप और नई मांगें सामने आने लगीं।
परिवार का कहना है कि जब हालात ज्यादा बिगड़े तो उन्होंने महिला थाना लखीमपुर खीरी में शिकायत की। शिकायत के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया। एक लिखित सुलहनामा भी तैयार हुआ, जिसमें भविष्य में किसी प्रकार की प्रताड़ना न करने का आश्वासन दिया गया।
लेकिन सवाल यह है कि अगर समझौता हो गया था, तो फिर मामला दोबारा क्यों उठा?
पीड़िता पक्ष का आरोप है कि समझौते के बाद भी हालात नहीं बदले। बल्कि दहेज की मांग और बढ़ गई। आरोप है कि ससुराल पक्ष ने पांच लाख रुपये की मांग की और कहा कि पति बेरोजगार है, दुकान कराने के लिए पैसों की जरूरत है।
क्या किसी बेटी का सम्मान पांच लाख रुपये से कम है?
क्या विवाह अब रिश्तों का बंधन नहीं बल्कि पैसों का सौदा बनता जा रहा है?
मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है।
पीड़िता पक्ष का कहना है कि मई 2026 में पूजा की तबीयत लगातार खराब रही। परिवार का आरोप है कि ससुराल पक्ष ने उसका समुचित इलाज नहीं कराया। मजबूर होकर पिता को स्वयं आगे आना पड़ा और बेटी का इलाज कराना पड़ा।
आरोप तो यहां तक हैं कि 28 मई 2026 को ससुराल पक्ष पूजा को उसके मायके बंडा छोड़ गया और कथित तौर पर अपमानजनक बातें कहते हुए वापस लौट गया।
एक बेटी, जो शादी के बाद अपने नए घर को ही अपना संसार मान लेती है, अगर उसे यह कहकर छोड़ दिया जाए कि “यहीं मरो, तुम्हें लेने नहीं आएंगे”, तो उसके मन पर क्या बीतती होगी?
यह सवाल सिर्फ पूजा का नहीं, उन हजारों महिलाओं का है जो आज भी दहेज और घरेलू प्रताड़ना का सामना कर रही हैं।
मामले में आरोप और भी गंभीर हो जाते हैं।
प्रार्थना पत्र के अनुसार विपक्षियों पर परिवार को झूठे मुकदमों में फंसाने, जान से मारने की धमकी देने और यहां तक कि सुपारी देकर हत्या करवाने जैसी धमकियां देने के आरोप लगाए गए हैं।
साथ ही पीड़िता के जेवरात अपने कब्जे में रखने का भी आरोप लगाया गया है।
यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल दहेज उत्पीड़न का मामला नहीं बल्कि कानून और मानवता दोनों को चुनौती देने वाला मामला बन जाता है।
अब पीड़िता पक्ष ने महिला थाना में दोबारा प्रार्थना पत्र देकर माधुरी गुप्ता, रंजीत गुप्ता समेत कुल नौ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
वहीं पुलिस का कहना है कि पूर्व में दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया था। अब पुनः शिकायत प्राप्त हुई है। मामले की जांच की जा रही है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल अभी भी वही है…
1-क्या पूजा को न्याय मिलेगा?
2-क्या दहेज के लिए प्रताड़ित करने वालों पर कानून का शिकंजा कसेगा?
3-क्या एक बेटी की पीड़ा को सुना जाएगा?
4-या फिर यह मामला भी कागजों और जांच की फाइलों में दबकर रह जाएगा?
देश में दहेज प्रतिषेध कानून, महिला सुरक्षा कानून और घरेलू हिंसा के खिलाफ सख्त प्रावधान मौजूद हैं। इसके बावजूद अगर बेटियां प्रताड़ना झेलने को मजबूर हैं, तो यह पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है।
जरूरत है कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों को सजा मिले और पीड़ित महिलाओं को न्याय मिले।
क्योंकि जब एक बेटी न्याय के लिए दर-दर भटकती है, तो सवाल सिर्फ उसके परिवार पर नहीं उठता, सवाल पूरे समाज और व्यवस्था पर उठता है।
फिलहाल निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं। जांच में क्या सच सामने आता है, यह आने वाला समय बताएगा। लेकिन एक बात तय है कि पूजा और उसके परिवार को न्याय की उम्मीद है।
क्या दहेज लोभियों पर होगी कार्रवाई?
क्या पूजा को मिलेगा इंसाफ?
या फिर एक बार फिर न्याय की राह लंबी साबित होगी?
इन सवालों के जवाब का इंतजार सिर्फ एक परिवार नहीं, पूरा समाज कर रहा है।