March 2, 2026

निघासन के दुबहा गांव में पराली जलाने से प्रदूषण का खतरा — प्रशासन हुई सक्रिय, लेकिन समस्या बनी हुई

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निघासन के दुबहा गांव में पराली जलाने से प्रदूषण का खतरा — प्रशासन हुई सक्रिय, लेकिन समस्या बनी हुई
ब्यूरो चीफ लखीमपुर खीरी – नीरज कुमार

लखीमपुर खीरी। निघासन तहसील के ग्राम पंचायत दुबहा में हाल ही एक गंभीर पर्यावरणीय और सुरक्षा समस्या सामने आई है। हाईवे सटे खेतों में किसान फसल कटाई के बाद बचे हुए फसल अवशेष — पराली — को आग लगाकर साफ कर रहे हैं। खास बात यह है कि यह घटना Radha Swami Satsang Bypass के ठीक पास हो रही है, जिसके कारण आसपास के इलाके में धुंध एवं प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ गया है।

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि पराली जलने से निकलने वाला धुआँ न सिर्फ वायु को प्रदूषित कर रहा है, बल्कि उस हाईवे से गुजरने वाले वाहनों के लिए भी दृश्यता कम कर दुर्घटना का खतरा खड़ा कर रहा है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह धुआँ खतरनाक है, खासकर सर्दियों में जब हवा स्थिर रहती है और धुंध बने रहने की संभावना रहती है।

पहले ही जिला प्रशासन की चेतावनी के तहत 11 ग्राम प्रधानों को नोटिस जारी किया जा चुका है। हालांकि इसके बावजूद पराली जलाने की घटनाएं रुक नहीं रही हैं। वर्तमान में दुर्गा शक्ति नागपाल के नेतृत्व में प्रशासन ने पराली जलाने पर जुर्माना और अन्य सख्त कदम उठाने की तैयारी की है। ग्राम प्रधानों एवं स्थानीय किसानों की जिम्मेदारी बढ़ चुकी है, विशेषकर उन गाँवों में जहाँ खेत सड़क-हाईवे से सटे हों।

विशेषज्ञों और जागरूक नागरिकों की राय है कि पराली जलाने की जगह पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाया जाए — जैसे कि बेलर मशीन या हैप्पी सीडर जैसे आधुनिक उपकरण। इससे न केवल धुआँ कम होगा, बल्कि फसलों के अवशेष का उपयोग भी बेहतर तरीके से हो सकेगा।

स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से जल्द से जल्द प्रभावी कार्रवाई की मांग की है ताकि इस प्रकार की लापरवाही रोकी जा सके। पर्यावरण, स्वास्थ्य और सड़क सुरक्षा की दृष्टि से यह समय की बहुत बड़ी जरूरत है कि पराली जलाने पर पूरी तरह पाबंदी लगाई जाए, और किसानों को वैकल्पिक समाधान अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए।

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