अवैध अस्पताल की खबर चलाना पड़ा भारी, संपादक को फोन पर मिल रहीं धमकियां — कॉल रिकॉर्डिंग मौजूद
अवैध अस्पताल की खबर चलाना पड़ा भारी, संपादक को फोन पर मिल रहीं धमकियां — कॉल रिकॉर्डिंग मौजूद
सीतापुर/खीरी।
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद के दंडपुरवा गांव में संचालित कथित अवैध अस्पताल का मामला अब गंभीर मोड़ लेता जा रहा है। पहले जहां इस अस्पताल में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किए जाने के आरोप सामने आए, वहीं अब इस पूरे मामले को उजागर करने वाले मीडिया संस्थान के संपादक को फोन पर धमकियां मिलने का मामला भी सामने आया है।
बताया जा रहा है कि लखीमपुर के नकहा से सिसैया रोड स्थित दंडपुरवा गांव में पेट्रोल पंप के सामने बेसमेंट में एक कथित अस्पताल लंबे समय से संचालित हो रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल बिना किसी वैध रजिस्ट्रेशन और मानकों के चलाया जा रहा है, जहां मरीजों का इलाज अनट्रेंड युवकों द्वारा किया जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार, अस्पताल में बिना मेडिकल डिग्री वाले युवक मरीजों को ड्रिप चढ़ाते, इंजेक्शन लगाते और भर्ती करते नजर आते हैं। इतना ही नहीं, यहां छोटे-मोटे ऑपरेशन किए जाने की भी चर्चा है। यदि यह सच है तो यह सीधे तौर पर लोगों की जिंदगी के साथ बड़ा खिलवाड़ माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अवैध अस्पताल की शिकायत करीब एक माह पहले संबंधित नोडल अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग को दी गई थी, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यही कारण है कि क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
खबर चलने के बाद बढ़ा दबाव, संपादक को मिली धमकी
मामला तब और गरमा गया जब इस कथित अवैध अस्पताल के खिलाफ खबरें प्रकाशित और प्रसारित की गईं। आरोप है कि खबर चलने से बौखलाए अस्पताल संचालक के गुर्गों ने मीडिया संस्थान के संपादक को फोन पर धमकियां देना शुरू कर दिया।
सूत्रों के मुताबिक, धमकी भरे कॉल में खबर हटाने और मामला दबाने का दबाव बनाया गया। पीड़ित पक्ष का दावा है कि इन कॉल्स की रिकॉर्डिंग भी मौजूद है, जिसे साक्ष्य के तौर पर सुरक्षित रखा गया है।
अपर पुलिस अधीक्षक खीरी को सौंपा शिकायत पत्र
फोन पर धमकी मिलने के बाद मामले की शिकायत अपर पुलिस अधीक्षक खीरी को लिखित रूप से दी गई है। शिकायत पत्र में सुरक्षा की मांग करते हुए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। अब पीड़ित पक्ष प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि आखिर इतने गंभीर मामले में स्वास्थ्य विभाग अब तक कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा। लोगों का आरोप है कि विभागीय मिलीभगत के चलते अवैध अस्पताल बेखौफ तरीके से संचालित हो रहे हैं।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस अस्पताल पर कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों की होगी।
अब देखने वाली बात यह होगी कि स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन इस मामले में कब कार्रवाई करते हैं, या फिर यूं ही लोगों की जिंदगी खतरे में डालकर यह खेल चलता रहेगा।