March 1, 2026

जिला कारागार में स्वास्थ्य सुविधाओं का व्यापक निरीक्षण: सीएमओ ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश डायबिटीज से ग्रसित 50 बंदियों की होगी टीबी जांच

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जिला कारागार में स्वास्थ्य सुविधाओं का व्यापक निरीक्षण: सीएमओ ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश
डायबिटीज से ग्रसित 50 बंदियों की होगी टीबी जांच

लखीमपुर खीरी, 09 दिसंबर।
जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत और संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. संतोष गुप्ता ने जिला कारागार का विस्तृत निरीक्षण किया। लगभग दोपहर 12 बजे शुरू हुए इस निरीक्षण में जेल अधीक्षक, जेल चिकित्सालय स्टाफ और संबंधित मेडिकल टीम मौजूद रही। निरीक्षण के दौरान सीएमओ ने बंदियों को उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, उपकरणों की स्थिति और चिकित्सकों की तैनाती को बारीकी से परखा।

आवश्यक उपकरणों और दवाओं की उपलब्धता का आकलन

निरीक्षण के दौरान सीएमओ ने जेल चिकित्सालय में उपलब्ध सभी जरूरी चिकित्सा उपकरणों—जैसे नेबुलाइज़र, ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर, ऑक्सीजन सिलेंडर, प्राथमिक उपचार सामग्री आदि—की स्थिति की समीक्षा की। संबंधित चिकित्साधिकारी ने बताया कि सभी प्रकार की आवश्यक दवाएं तथा उपकरण पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।

महिला बंदियों और गंभीर रोगियों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान

कारागार में वर्तमान में 33 महिला बंदी निरुद्ध हैं। निरीक्षण के दौरान सीएमओ ने महिला बंदियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी जानी और यह सुनिश्चित किया कि उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

इसके साथ ही निरीक्षण के दौरान यह तथ्य सामने आया कि जेल में लगभग 50 बंदी डायबिटीज से ग्रसित हैं। ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ ने सभी डायबिटिक बंदियों की टीबी जांच कराने के निर्देश जिला क्षय रोग अधिकारी/डिप्टी सीएमओ तथा डॉ. प्रमोद कुमार रावत को दिए। यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तियों में टीबी संक्रमण का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होता है।

विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम करेगी गहन जांच

सीएमओ ने यह भी निर्देश दिया कि ईएनटी विशेषज्ञ जल्द ही जेल परिसर का भ्रमण कर सभी बंदियों की थ्रोट, ईयर और नाक संबंधी समस्याओं की जांच करें। उन्होंने कहा कि यदि किसी बंदी में गंभीर लक्षण पाए जाते हैं, तो उसका तुरंत रेफरल या विशेष उपचार सुनिश्चित किया जाए।

नियमित स्वास्थ्य जांच अनिवार्य

डॉ. गुप्ता ने जेल प्रशासन को निर्देशित किया कि सभी बंदियों की नियमित स्वास्थ्य जांच रोस्टर के अनुसार सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चिकित्सकों द्वारा दी जा रही सुविधाओं, दवाओं के वितरण, स्वास्थ्य रिकॉर्ड के रख-रखाव और मरीजों की फॉलो-अपिंग की भी समीक्षा की।

सीएमओ ने बताया कि इससे पूर्व भी जेल में निरुद्ध बंदियों की एड्स, टीबी एवं अन्य संक्रामक रोगों की जांच की जा चुकी है और स्वास्थ्य विभाग लगातार जेल प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर बंदियों के स्वास्थ्य संरक्षण को प्राथमिकता दे रहा है।

जेल प्रशासन में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने का प्रयास

निरीक्षण के समापन पर सीएमओ ने कहा कि जिला कारागार जैसे संवेदनशील स्थल पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता का सीधा संबंध बंदियों के जीवन से है। इसलिए विभाग का प्रयास है कि यहां उपलब्ध स्वास्थ्य संसाधन आधुनिक, पर्याप्त और प्रभावी हों। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे और भविष्य में भी ऐसे निरीक्षण नियमित रूप से जारी रहेंगे।

इस निरीक्षण ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि जिला स्वास्थ्य विभाग जेल बंदियों के स्वास्थ्य अधिकारों को गंभीरता से लेता है और उनकी सुरक्षा एवं उपचार को लेकर निरंतर सजग है।

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