नेपाल बॉर्डर पर मानवता की मिसाल: गुरुखनाथ स्वास्थ्य सेवा शिविर यात्रा का शुभारंभ, सैकड़ों ग्रामीणों को मिला नि:शुल्क इलाज
लखीमपुर खीरी / संवाददाता – नीरज कुमार (ब्यूरो चीफ)
राष्ट्रध्वनि भारत वाणी न्यूज़ नेटवर्क
नेपाल सीमा से सटे ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के बीच गुरुखनाथ स्वास्थ्य सेवा शिविर यात्रा आमजन के लिए राहत की बड़ी सौगात बनकर सामने आई है। इस सेवा यात्रा का शुभारंभ सरस्वती विद्या मंदिर, बेलापरसुआ (नेपाल बॉर्डर) में विधिवत रूप से किया गया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पहुंचकर नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण और दवा वितरण का लाभ उठाया।
इस स्वास्थ्य शिविर का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती और दूरदराज़ क्षेत्रों में रहने वाले जरूरतमंद लोगों तक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना रहा। शिविर में सभी प्रकार की आवश्यक दवाइयां नि:शुल्क उपलब्ध कराई गईं, वहीं विभिन्न बीमारियों की जांच भी पूरी तरह मुफ्त की गई। डॉक्टरों की टीम ने मरीजों की जांच कर उन्हें उचित परामर्श दिया, जिससे लोगों में इस शिविर को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।
भारी संख्या में उमड़े लोग
स्वास्थ्य शिविर की जानकारी मिलते ही नेपाल बॉर्डर से लगे गांवों के सैकड़ों ग्रामीण शिविर स्थल पर पहुंच गए। पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की भी बड़ी संख्या रही। खासकर वे लोग, जो आर्थिक मजबूरी या दूरी के कारण नियमित इलाज नहीं करा पाते, उनके लिए यह शिविर किसी वरदान से कम नहीं रहा।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के शिविर सीमावर्ती क्षेत्रों में बहुत जरूरी हैं, जहां सरकारी और निजी स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं। नि:शुल्क दवाइयों और जांच की सुविधा मिलने से लोगों को बड़ी राहत मिली है।
कई गांवों में लगाए गए शिविर
गुरुखनाथ स्वास्थ्य सेवा शिविर यात्रा के अंतर्गत नेपाल बॉर्डर के कई निम्न गांवों में कैंप लगाकर दवा वितरण एवं स्वास्थ्य जांच की गई। इनमें प्रमुख रूप से
बेलापरसुआ, कड़ियां, जसनगर, गंगानगर, टांडा रायपुर, सुथनाबरसोला, लटठौवा, हरद्वाही, बनबीरपुर, चौगुर्जी सहित अन्य गांव शामिल रहे।
इन गांवों में चिकित्सा टीम ने घर-घर और कैंपों के माध्यम से लोगों की समस्याएं सुनीं और मौके पर ही दवाइयां उपलब्ध कराईं। बुखार, सर्दी-खांसी, पेट रोग, ब्लड प्रेशर, शुगर, जोड़ों का दर्द और त्वचा रोग जैसी सामान्य लेकिन गंभीर हो सकती बीमारियों की जांच विशेष रूप से की गई।
सेवा भाव से प्रेरित पहल
गुरुखनाथ स्वास्थ्य सेवा शिविर यात्रा केवल एक चिकित्सा कार्यक्रम नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण बनकर उभरी है। आयोजन से जुड़े स्वयंसेवकों और चिकित्सकों ने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी सेवाएं दीं। शिविर में व्यवस्था, साफ-सफाई और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
ग्रामीणों ने जताया आभार
शिविर से लाभान्वित हुए ग्रामीणों ने आयोजनकर्ताओं और चिकित्सा टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। कई बुजुर्गों ने कहा कि पहली बार उन्हें अपने ही गांव के पास इस तरह की बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिली है। महिलाओं ने भी इस पहल को सराहते हुए कहा कि नि:शुल्क जांच और दवा मिलने से परिवार पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम हुआ है।
आगे भी जारी रहेगी यात्रा
आयोजन से जुड़े सूत्रों के अनुसार गुरुखनाथ स्वास्थ्य सेवा शिविर यात्रा आगे भी सीमावर्ती और जरूरतमंद क्षेत्रों में जारी रहेगी, ताकि अधिक से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके। इस प्रकार के शिविर ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समय पर इलाज सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कुल मिलाकर, नेपाल बॉर्डर क्षेत्र में आयोजित गुरुखनाथ स्वास्थ्य सेवा शिविर यात्रा ने यह साबित कर दिया कि यदि सेवा भाव से प्रयास किए जाएं, तो दूरदराज़ इलाकों तक भी स्वास्थ्य की रोशनी पहुंचाई जा सकती है। यह पहल निश्चित रूप से समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनकर सामने आई है।
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