सुनने में दिक्कत, कानों में मशीन… लेकिन हौसले आसमान से ऊंचे: खीरी के प्रणव तिवारी ने जीता नेशनल गोल्ड
Vivek Gupta May 8, 2026 0
सुनने में दिक्कत, कानों में मशीन… लेकिन हौसले आसमान से ऊंचे: खीरी के प्रणव तिवारी ने जीता नेशनल गोल्ड
लखीमपुर खीरी के लिए गर्व और प्रेरणा से भरी खबर सामने आई है। जिले के युवा शूटर प्रणव तिवारी ने भोपाल में आयोजित 24वीं कुमार सुरेंद्र सिंह मेमोरियल नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीत लिया है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल लखीमपुर खीरी बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश को गौरवान्वित कर दिया है।
प्रणव की कहानी सिर्फ एक मेडल जीतने की नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और अटूट हौसले की कहानी है। बचपन से ही उन्हें सुनने में दिक्कत रही और उनके दोनों कानों में मशीन लगी हुई है। लेकिन उन्होंने कभी अपनी इस कमजोरी को अपनी पहचान नहीं बनने दिया। जिस उम्र में लोग छोटी-छोटी परेशानियों से हार मान लेते हैं, उस उम्र में प्रणव ने अपने सपनों को अपनी ताकत बना लिया।

मुश्किलों को बनाया अपनी ताकत
कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। प्रणव तिवारी ने इसे सच साबित कर दिखाया है। सुनने में परेशानी होने के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य पर पूरा फोकस बनाए रखा। शूटिंग जैसे खेल में जहां एकाग्रता, मानसिक संतुलन और सटीक नियंत्रण बेहद जरूरी होता है, वहां प्रणव ने खुद को लगातार बेहतर बनाया।
उनकी शुरुआती पढ़ाई लखीमपुर खीरी में हुई। यहीं से उनके सपनों ने उड़ान भरनी शुरू की। परिवार और शिक्षकों के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। धीरे-धीरे शूटिंग के प्रति उनका जुनून बढ़ता गया और उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का सपना देखना शुरू किया।
तीन साल की कड़ी मेहनत लाई रंग
पिछले तीन वर्षों से प्रणव फरीदाबाद में रहकर भारतीय टीम के कोच दीपक दुबे के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रहे हैं। रोजाना घंटों अभ्यास, अनुशासित दिनचर्या और लगातार मेहनत ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है।
बताया जाता है कि प्रणव ने अपने लक्ष्य के लिए कई त्याग किए। परिवार से दूर रहकर उन्होंने पूरी मेहनत शूटिंग पर केंद्रित की। कठिन प्रशिक्षण, मानसिक दबाव और प्रतियोगिताओं की चुनौतियों के बीच उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
भोपाल में आयोजित नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में देशभर के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। ऐसे कठिन मुकाबले में स्वर्ण पदक जीतना प्रणव की प्रतिभा और मेहनत का सबसे बड़ा प्रमाण माना जा रहा है।

जिले में खुशी और गर्व का माहौल
जैसे ही प्रणव की जीत की खबर लखीमपुर खीरी पहुंची, जिले में खुशी की लहर दौड़ गई। खेल प्रेमियों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने उन्हें बधाई दी। सोशल मीडिया पर भी लोग उनकी उपलब्धि की जमकर सराहना कर रहे हैं।
लोगों का कहना है कि प्रणव ने यह साबित कर दिया कि शारीरिक चुनौतियां सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। जरूरत होती है तो केवल मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर मेहनत की।
युवाओं के लिए बने प्रेरणा
प्रणव तिवारी आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे खिलाड़ी समाज में सकारात्मक ऊर्जा भरते हैं। प्रणव जैसे युवा उन बच्चों के लिए उम्मीद की किरण हैं, जो किसी शारीरिक कमजोरी के कारण खुद को कमजोर समझने लगते हैं।
अब ओलंपिक गोल्ड है अगला सपना
नेशनल स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने के बाद अब प्रणव का लक्ष्य और बड़ा हो गया है। उनका सपना भारत के लिए ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना है। वे चाहते हैं कि एक दिन तिरंगा दुनिया के सबसे बड़े खेल मंच पर उनके कारण गर्व से लहराए।
प्रणव का कहना है कि यह शुरुआत है, मंजिल अभी बहुत दूर है। वे लगातार मेहनत करते रहना चाहते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करना चाहते हैं।
खीरी के लिए गर्व का पल
लखीमपुर खीरी जैसे जिले से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। प्रणव तिवारी ने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। यदि मेहनत और लगन सच्ची हो, तो छोटे शहरों से निकलने वाले युवा भी देश-दुनिया में अपना परचम लहरा सकते हैं।
आज पूरा लखीमपुर खीरी अपने इस होनहार बेटे पर गर्व महसूस कर रहा है। प्रणव की यह सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का नया अध्याय बन चुकी है।