टीकाकरण अभियान को धार देने के लिए स्वास्थ्य विभाग की बड़ी पहल, सीएमओ की अध्यक्षता में संपन्न हुआ जनपद स्तरीय प्रशिक्षण
टीकाकरण अभियान को धार देने के लिए स्वास्थ्य विभाग की बड़ी पहल, सीएमओ की अध्यक्षता में संपन्न हुआ जनपद स्तरीय प्रशिक्षण
लखीमपुर खीरी।
जनपद में नियमित टीकाकरण कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणाममूलक बनाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है। विशेष रूप से उन बच्चों तक टीकाकरण की पहुंच सुनिश्चित करने पर फोकस किया जा रहा है, जिन्हें अब तक एक भी टीका नहीं लग पाया है। इन्हें स्वास्थ्य विभाग की भाषा में “जीरो डोज” बच्चे कहा जाता है। इन्हीं बच्चों की शत-प्रतिशत पहचान कर उन्हें टीकाकरण के दायरे में लाने के लिए गुरुवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता की अध्यक्षता में कार्यालय सभागार में एक दिवसीय जनपद स्तरीय संवेदीकरण प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई।

कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, सहायक शोध अधिकारियों, ब्लॉक स्तरीय चिकित्सा अधिकारियों और सीएचसी अधीक्षकों को टीकाकरण आंकड़ों की गुणवत्ता सुधारने, डेटा विश्लेषण प्रणाली को मजबूत करने और डिजिटल पोर्टलों के प्रभावी उपयोग को लेकर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य स्तर से आए विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को तकनीकी जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम में स्टेट एनालिस्ट यूपी एवं हरियाणा डॉ. शिखर चौधरी तथा नेशनल डाटा एनालिस्ट अरविंद कुमार ने स्वास्थ्य अधिकारियों को डेटा प्रबंधन और विश्लेषण के महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में टीकाकरण कार्यक्रम की सफलता केवल फील्ड वर्क पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि डेटा की गुणवत्ता और उसकी सटीक रिपोर्टिंग भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता ने प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा धरातल पर किए जा रहे कार्यों का सही मूल्यांकन तभी संभव है, जब आंकड़े पूरी तरह शुद्ध और अद्यतन हों। उन्होंने कहा कि यदि डेटा सही तरीके से पोर्टल पर अपलोड होगा, उसमें त्रुटियां नहीं होंगी और जानकारी वास्तविक स्थिति के अनुरूप होगी, तो न केवल जिले की रैंकिंग बेहतर होगी बल्कि टीकाकरण अभियान की वास्तविक सफलता भी सामने आएगी।
सीएमओ ने अधिकारियों से कहा कि कई बार उत्कृष्ट कार्य होने के बावजूद गलत या अधूरा डेटा पूरे अभियान की छवि को प्रभावित कर देता है। इसलिए अब स्वास्थ्य विभाग डेटा की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने कहा कि टीकाकरण कार्यक्रम का उद्देश्य केवल आंकड़े बढ़ाना नहीं, बल्कि हर बच्चे तक स्वास्थ्य सुरक्षा पहुंचाना है।
कार्यशाला में बताया गया कि महानिदेशक परिवार कल्याण, उत्तर प्रदेश के निर्देशानुसार यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य सहायक शोध अधिकारियों (एआरओ) की क्षमता बढ़ाना और ऐसे बच्चों की पहचान करना है, जिन्हें अब तक किसी भी प्रकार का टीका नहीं लगाया गया है। विभाग का लक्ष्य है कि “जीरो डोज” बच्चों की संख्या को पूरी तरह समाप्त किया जाए ताकि कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रह जाए।

प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को विभिन्न डिजिटल पोर्टलों के उपयोग और डेटा एंट्री प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। इसमें विशेष रूप से एचएमआईएस (HMIS), यू-विन (U-WIN) और पीसीटीएस (PCTS) पोर्टल पर डेटा अपलोडिंग, मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) समझाई गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि इन पोर्टलों के माध्यम से टीकाकरण की निगरानी अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाई जा सकती है।
राज्य स्तरीय प्रशिक्षकों ने स्वास्थ्य अधिकारियों को यह भी बताया कि डेटा विश्लेषण के माध्यम से किन क्षेत्रों में टीकाकरण की स्थिति कमजोर है, इसका आसानी से पता लगाया जा सकता है। इससे ऐसे क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंच बनाई जा सकती है। प्रशिक्षण में फील्ड स्तर पर आने वाली व्यावहारिक समस्याओं और उनके समाधान पर भी चर्चा की गई।
सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता ने निर्देश दिए कि जनपद स्तर पर प्रशिक्षित अधिकारी अब अपने-अपने ब्लॉकों में जाकर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेंगे। उन्होंने कहा कि 29 मई 2026 तक सभी ब्लॉक स्तरों पर टीकाकरण करने वाले कर्मचारियों और डाटा एंट्री ऑपरेटरों को प्रशिक्षित किया जाना अनिवार्य होगा। इससे जिले में टीकाकरण अभियान को और अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की सफलता टीमवर्क और सतत मॉनिटरिंग पर निर्भर करती है। यदि प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी के साथ कार्य किया जाए तो जिले में शत-प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकता है।
कार्यशाला के दौरान जिला प्रशिक्षण अधिकारी डॉ. रवि सिंह सहित विभिन्न स्वास्थ्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर अधिकारियों ने संकल्प लिया कि जिले में कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित नहीं रहेगा और डेटा की गुणवत्ता सुधारकर स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।