थारू जनजाति के तीन पुरुषों की नसबंदी—पलिया ब्लॉक ने दिया परिवार नियोजन का मजबूत संदेश
एक साथ हुई तीन पुरुष नसबंदी, 36 महिलाओं ने भी कराई नसबंदी—सीएमओ ने टीम को सराहा
लखीमपुर खीरी।
परिवार नियोजन को लेकर जागरूकता अब थारू जनजाति के बीच भी तेजी से बढ़ रही है। संयमित परिवार और संतुलित जनसंख्या को विकास की कुंजी मानते हुए इस समुदाय के लोग आगे आ रहे हैं। इसी जागरूक सोच की एक मिसाल पलिया ब्लॉक में देखने को मिली, जहां थारू जनजाति के तीन पुरुषों ने एक साथ नसबंदी कराई। यह कदम न केवल उनके परिवारों के लिए सशक्त निर्णय है, बल्कि पूरे जिले के लिए परिवार नियोजन का संदेश भी देता है।

सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि सब-सेंटर निझोटा में एएनएम रामपति राणा की सक्रिय पहल और प्रेरणा के कारण यह उपलब्धि संभव हो सकी। ब्लॉक काउंसलर विनीता, बीपीएम पंकज, और पूरी पलिया स्वास्थ्य टीम ने इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह कार्रवाई पूरी तरह समयबद्ध और सुचारू तरीके से की गई।
अधीक्षक डॉ. भरत सिंह ने बताया कि सीएमओ के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में जिला पुरुष चिकित्सालय के सर्जन डॉ. सतीश वर्मा ने महत्वपूर्ण सेवा प्रदान की। उन्होंने न केवल तीन पुरुष नसबंदी की बल्कि उसी दिन 8 सीज़ेरियन महिला नसबंदी और 28 सामान्य महिला नसबंदी भी कीं। कुल मिलाकर 36 महिलाओं ने भी नसबंदी कराई, जिससे परिवार नियोजन अभियान को और मजबूती मिली।
सीएमओ ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह पहल जिले में परिवार नियोजन जागरूकता को नई दिशा देती है। उन्होंने पुरुष नसबंदी (NSV – No Scalpel Vasectomy) के लाभ बताते हुए कहा कि यह एक सुरक्षित, सरल और स्थायी विधि है जिसमें न चीरा लगता है, न टांके। प्रक्रिया केवल 10–15 मिनट में पूरी हो जाती है। इसमें दर्द कम होता है और मरीज 1–2 दिन में अपनी सामान्य दिनचर्या शुरू कर सकता है। गंभीर दुष्प्रभाव का जोखिम लगभग नगण्य होता है, जबकि यह महिलाओं पर नसबंदी का दबाव कम करके दंपतियों को संतुलित निर्णय लेने में मदद करता है।
शारीरिक रूप से भी पुरुष नसबंदी पूरी तरह सुरक्षित है। इससे न तो यौन क्षमता पर कोई असर पड़ता है, न ताकत या हार्मोन में बदलाव आता है। शरीर की सामान्य क्रियाओं पर कोई प्रभाव नहीं होता। कुछ शोध भविष्य में प्रोस्टेट और प्रजनन तंत्र से जुड़े जोखिमों में कमी की भी ओर संकेत करते हैं। इसके बावजूद जागरूकता की कमी के चलते पुरुष नसबंदी कम कराई जाती है, जबकि विशेषज्ञ इसे महिला नसबंदी की तुलना में अधिक सरल और जोखिमरहित मानते हैं।
पलिया ब्लॉक की यह पहल न केवल स्वास्थ्य विभाग के लिए उपलब्धि है, बल्कि जनपद में एक सकारात्मक और प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत करती है, जो आने वाले समय में अन्य क्षेत्रों में भी जागरूकता बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करेगी।
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