March 1, 2026

जानिए कहाँ है ऐसा अनोखा मंदिर, जहाँ भूख से दुबले हो जाते हैं श्रीकृष्ण

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ऐसा अनोखा मंदिर, जहाँ भूख से दुबले हो जाते हैं श्रीकृष्ण
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यह दुनिया का एकमात्र ऐसा अद्भुत मंदिर है, जहाँ विराजमान भगवान श्रीकृष्ण को सदैव तीव्र भूख लगती है। मान्यता है कि यदि समय पर भोग न लगाया जाए, तो उनका विग्रह धीरे-धीरे सूखने लगता है। इसी कारण यह मंदिर 24 घंटे में सिर्फ़ 2 मिनट के लिए बंद होता है। आश्चर्य की बात यह है कि ग्रहण काल में भी मंदिर बंद नहीं किया जाता

यह चमत्कारी मंदिर केरल के कोट्टायम ज़िले के तिरुवरप्पु में स्थित है और लगभग डेढ़ हजार वर्ष पुराना माना जाता है। लोककथाओं के अनुसार, कंस वध के बाद भगवान श्रीकृष्ण अत्यंत थक गए थे और उन्हें तीव्र भूख लगी थी। उसी अवस्था का उनका विग्रह यहां स्थापित है। इसी वजह से मंदिर में दिन-रात निरंतर भोग अर्पित किया जाता है।

🔸 दिन में सिर्फ़ 2 मिनट विश्राम
मंदिर प्रतिदिन ठीक 11:58 बजे बंद होता है और 12:00 बजे पुनः खोल दिया जाता है। इन दो मिनटों को भगवान का विश्राम समय माना जाता है। पुजारी को ताले की चाबी के साथ कुल्हाड़ी भी दी जाती है, ताकि ताला खुलने में ज़रा-सी भी देरी हो तो उसे तोड़ दिया जाए—बस इसीलिए कि भगवान को भोग में विलंब न हो।

🔸 10 बार चढ़ता है नैवेद्यम
यहाँ भगवान श्रीकृष्ण को प्रतिदिन 10 बार नैवेद्यम (भोग) अर्पित किया जाता है। अभिषेक के दौरान जब थोड़ी देर के लिए भोग रुकता है, तब भक्तों के अनुसार विग्रह पहले सिर से और फिर पूरे शरीर से सूखता हुआ दिखाई देता है—यह दृश्य श्रद्धालुओं को विस्मय में डाल देता है।

🔸 आदि शंकराचार्य से जुड़ी परंपरा
कहा जाता है कि पहले यह मंदिर अन्य मंदिरों की तरह बंद होता था, खासकर ग्रहण के समय। एक बार ग्रहण के बाद आदि शंकराचार्य जब यहाँ आए, तो उन्होंने देखा कि भूख के कारण विग्रह अत्यंत दुर्बल प्रतीत हो रहा है। तब उन्होंने आदेश दिया कि मंदिर कभी भी बंद न किया जाए। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।

🔸 प्रसादम् लेने वाले की आजीवन चिंता करते हैं श्रीकृष्ण
इस मंदिर की सबसे भावुक मान्यता यह है कि जो भक्त यहाँ प्रसादम ग्रहण कर लेता है, उसके जीवन भर के भोजन और आवश्यकताओं की चिंता स्वयं श्रीकृष्ण करते हैं। यही कारण है कि मंदिर बंद होने से ठीक पहले 11:57 बजे पुजारी ज़ोर से आवाज़ लगाते हैं, ताकि कोई भी भक्त प्रसाद से वंचित न रह जाए। बिना प्रसाद लिए किसी को लौटने नहीं दिया जाता।

भूख से व्याकुल भगवान, और अपने भक्तों के भोजन की आजीवन चिंता—
ऐसा अद्भुत, करुणामय और रहस्यमयी स्वरूप कहीं और नहीं मिलता।

🌹 जय श्री कृष्ण 🌹

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