March 1, 2026

केले के तने से आत्मनिर्भरता की ओर: सीडीओ ने कृषकों को दिया सीख को गांव-गांव पहुंचाने का संदेश

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केले के तने से आत्मनिर्भरता की ओर: सीडीओ ने कृषकों को दिया सीख को गांव-गांव पहुंचाने का संदेश

लखीमपुर खीरी जिले में आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में एक नई कहानी लिखी जा रही है। केले के तने को बेकार समझने की सोच अब बदल रही है और उससे आय अर्जन का नया रास्ता खुल रहा है। इसी सोच को मजबूत करने के लिए जिले के 25 कृषक और स्वयं सहायता समूह सदस्यों को गुजरात के नवसारी कृषि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक भ्रमण के लिए भेजा गया।

मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक कुमार ने इस दल को रवाना करते हुए किसानों से सीधा संवाद किया। उन्होंने बस में जाकर महिला कृषकों से बातचीत की और उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

सीडीओ ने कहा कि यह यात्रा केवल ज्ञान अर्जन की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी की भी है। उन्होंने कहा कि नवसारी में जो भी सीखें, उसे अपने गांव तक सीमित न रखें, बल्कि आसपास के गांवों में भी प्रशिक्षण दें। यही इस परियोजना की असली सफलता होगी।

यह शैक्षणिक भ्रमण नाबार्ड के FSPF फंड से स्वीकृत “केला फाइबर आधारित उत्पाद” परियोजना के तहत कराया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य केले के तने से फाइबर निकालकर रोजगार और आय के नए अवसर पैदा करना है।

नवसारी कृषि विश्वविद्यालय में यह दल आधुनिक मशीनों, प्रोसेसिंग यूनिट, उत्पाद निर्माण और मार्केटिंग के व्यावहारिक मॉडल देखेगा। इससे किसानों को यह समझने में मदद मिलेगी कि खेती को कैसे उद्योग से जोड़ा जा सकता है।

नाबार्ड के डीडीएम प्रसून ने बताया कि परियोजना के तहत केला फाइबर इंजीनियरिंग बोर्ड, वर्मी कम्पोस्ट और हस्तशिल्प उत्पादों पर काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि केला तना, जिसे पहले बेकार माना जाता था, अब किसानों को अतिरिक्त आय दे रहा है।

इस परियोजना से जिले के 50 कृषक और 100 स्वयं सहायता समूह सदस्य लाभान्वित होंगे। इससे महिलाओं को स्वरोजगार मिलेगा और गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।

कार्यक्रम में पीडी डीआरडीए एस.एन. चौरसिया, एआरसीएस रजनीश कुमार सिंह, एलडीएम अशोक कुमार गुप्ता और सीवीओ डॉ. दिनेश सचान उपस्थित रहे।

यह पहल दिखाती है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और तकनीक के साथ ग्रामीण किसान भी नवाचार के जरिए आत्मनिर्भर बन सकते हैं। केले के तने से शुरू हुई यह यात्रा जिले के विकास की नई पहचान बन सकती है।

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