March 1, 2026

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अतर्रा में दूसरी सफल सिजेरियन डिलीवरी, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में नया भरोसा

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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अतर्रा में दूसरी सफल सिजेरियन डिलीवरी, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में नया भरोसा

रिपोर्टिंग : रामप्रकाश गुप्ता

अतर्रा (बांदा)। तहसील अतर्रा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) अतर्रा लगातार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का भरोसेमंद केंद्र बनता जा रहा है। 30 दिसंबर 2025 को सीएचसी अतर्रा में दूसरी बार सफल सिजेरियन डिलीवरी कराई गई, जिसने क्षेत्र की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को एक नई मजबूती प्रदान की है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 24 दिसंबर 2025 को सीएचसी अतर्रा में पहली बार सफलतापूर्वक सिजेरियन ऑपरेशन किया गया था। महज कुछ दिनों के भीतर दूसरी जटिल प्रसूति का सफल संचालन यह साबित करता है कि अब गंभीर मामलों में महिलाओं को जिला मुख्यालय या बड़े अस्पतालों में रेफर करने की मजबूरी लगातार कम होती जा रही है।

सीएचसी प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अरविंद कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्राम आऊ निवासी सुमन पत्नी अजय कुमार को प्रसव पीड़ा के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकीय जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि सामान्य प्रसव संभव नहीं है और स्थिति जटिल हो सकती है। ऐसे में मां और बच्चे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चिकित्सकों की टीम ने सिजेरियन ऑपरेशन का निर्णय लिया।

यह सिजेरियन डिलीवरी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजेंद्र सिंह के निर्देशन में संपन्न हुई। सर्जरी डॉ. पल्लवी कौशल द्वारा कुशलता से की गई, जबकि एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. नरेंद्र विश्वकर्मा ने निभाई। पूरे ऑपरेशन की सतत निगरानी एमओआईसी डॉ. अरविंद कुमार द्वारा की गई। इस दौरान नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों ने भी पूरी तत्परता और समर्पण के साथ सहयोग किया।

सफल ऑपरेशन के बाद जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। समय पर सुरक्षित उपचार मिलने से परिजनों ने राहत की सांस ली और चिकित्सा टीम का आभार जताया। परिजनों का कहना है कि अब उन्हें जिला मुख्यालय बांदा या चित्रकूट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, जिससे समय, धन और जोखिम तीनों की बचत होगी।

गौरतलब है कि पूर्व में इस तरह के जटिल प्रसूति मामलों में गर्भवती महिलाओं को जिला अस्पताल या अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों के लिए रेफर किया जाता था। लंबी दूरी, देरी और संसाधनों की कमी के कारण कई बार मां और शिशु दोनों के लिए खतरा बढ़ जाता था। अब सीएचसी अतर्रा में लगातार दूसरी बार सिजेरियन डिलीवरी सफल होने से स्थानीय लोगों का भरोसा स्वास्थ्य सेवाओं पर और मजबूत हुआ है।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार की उन्नत सुविधाओं के विस्तार से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी और लोगों को समय पर गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सकेगा। सीएचसी अतर्रा की यह उपलब्धि न केवल क्षेत्र के लिए गर्व की बात है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

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