जालौन में CBI का बड़ा एक्शन: रेलवे भर्ती में रिश्वतखोरी का भंडाफोड़
जालौन। जनपद जालौन के उरई रेलवे स्टेशन स्थित टीआरडी (ट्रैक्शन रोलिंग स्टॉक/ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूशन) विभाग में देर रात बड़ी कार्रवाई करते हुए Central Bureau of Investigation (CBI) की टीम ने छापेमारी की। संविदा भर्ती के नाम पर कथित रिश्वतखोरी के आरोप में सीनियर सेक्शन इंजीनियर सहित तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई से रेलवे विभाग और स्थानीय प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
सूत्रों के अनुसार, CBI को कुछ समय पहले शिकायत मिली थी कि संविदा भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों से पैसे की मांग की जा रही है। शिकायत के आधार पर एजेंसी ने पहले गोपनीय जांच शुरू की। प्राथमिक तथ्यों की पुष्टि होने के बाद टीम ने जाल बिछाया और कथित तौर पर एक आरोपी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। इसके बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए अन्य संबंधित कर्मचारियों को भी हिरासत में लिया गया।

लखनऊ से पहुंची थी विशेष टीम
बताया जा रहा है कि कार्रवाई के लिए CBI की विशेष टीम लखनऊ से जालौन पहुंची थी। टीम ने देर रात करीब 12 बजे उरई रेलवे स्टेशन परिसर स्थित टीआरडी कार्यालय और रेलवे कॉलोनी में एक साथ छापेमारी की। लगभग ढाई घंटे तक चली इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने दस्तावेजों की गहन जांच की और कई महत्वपूर्ण कागजात व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अपने कब्जे में लिए।
कार्रवाई की प्रमुख बातें
🔹 एक गिरफ्तारी उरई से
🔹 दो गिरफ्तारियां चित्रकूट से
🔹 संविदा भर्ती प्रक्रिया में पैसों की मांग का आरोप
🔹 रात 12 बजे रेलवे कॉलोनी व टीआरडी कार्यालय में छापेमारी
🔹 करीब ढाई घंटे तक पूछताछ और तलाशी
छापेमारी की खबर फैलते ही रेलवे कॉलोनी में हलचल मच गई। विभागीय कर्मचारियों में बेचैनी और तनाव का माहौल देखने को मिला। कई कर्मचारी देर रात तक घटनाक्रम पर नजर बनाए रहे। स्थानीय लोगों के बीच भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज रहीं।
संविदा भर्ती पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने संविदा भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि कुछ कर्मचारियों द्वारा अभ्यर्थियों से नौकरी दिलाने के नाम पर धन की मांग की जा रही थी। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी या अर्द्धसरकारी संस्थानों में भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। भर्ती में भ्रष्टाचार से योग्य उम्मीदवारों का हक मारा जाता है और व्यवस्था पर से जनता का विश्वास कमजोर होता है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई से ही सुधार संभव है।
आगे क्या?
फिलहाल तीनों आरोपियों से पूछताछ जारी है। CBI द्वारा जब्त किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है। यह भी संभावना जताई जा रही है कि जांच का दायरा बढ़ सकता है और अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति का इंतजार किया जा रहा है, जिसमें पूरे मामले का विस्तृत ब्यौरा सामने आ सकता है।
जालौन और चित्रकूट क्षेत्र में इस कार्रवाई को बड़ा संदेश माना जा रहा है। आमजन का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष और गहन हुई तो भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी। वहीं युवाओं को उम्मीद है कि इस तरह की कार्रवाई से भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता पर अंकुश लगेगा।
रेलवे विभाग की ओर से फिलहाल कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि विभाग भी आंतरिक स्तर पर मामले की समीक्षा कर रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या यह मामला कुछ कर्मचारियों तक सीमित है या भर्ती प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर अनियमितताएं थीं।
फिलहाल पूरे क्षेत्र की नजर CBI की अगली कार्रवाई पर टिकी है। यह देखना अहम होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या इस मामले में और गिरफ्तारियां होती हैं। इतना तय है कि इस छापेमारी ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
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