श्रावण से पहले अधूरा रहा तो कार्रवाई तय: गोला शिव मंदिर कॉरिडोर पर डीएम का अल्टीमेटम
लखीमपुर-खीरी प्रशासन ने गोला गोकर्णनाथ शिव मंदिर कॉरिडोर निर्माण को लेकर ठेकेदारों को साफ अल्टीमेटम दे दिया है। जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि श्रावण मास से पहले कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं दिखाई गई तो अनुबंध के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
डीएम के निर्देश पर गठित चार सदस्यीय जांच समिति ने जब मौके पर जाकर निरीक्षण किया, तो कई गंभीर खामियां सामने आईं। समिति ने पाया कि निर्माण स्थल पर श्रमिकों की संख्या बेहद कम है और कार्य की गति अनुबंध के अनुरूप नहीं है। यह स्थिति तब है, जब परियोजना की समय सीमा तेजी से करीब आ रही है।

समिति ने निर्माण कार्य से जुड़े दस्तावेजों और बार-चार्ट का विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि अनुबंध के अनुसार कार्य 15 मार्च 2026 तक पूरा किया जाना है, लेकिन ठेकेदार इसे अगस्त 2026 तक खींचना चाहते हैं। यह अनुबंध की शर्तों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है।
गोला गोकर्णनाथ शिव मंदिर में श्रावण मास के दौरान देशभर से श्रद्धालु और कांवड़िए पहुंचते हैं। उस दौरान यदि कॉरिडोर अधूरा रहता है, तो श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

इन्हीं आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए जांच समिति ने डीएम को सौंपी गई रिपोर्ट में ठेकेदारों के विरुद्ध लिक्विडेटेड डैमेज लगाने की सिफारिश की है। प्रशासन ने इस पर तुरंत कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक तीन अलग-अलग अनुबंधों के तहत ठेकेदारों पर कुल मिलाकर 5 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना प्रस्तावित किया गया है। यह राशि ठेकेदारों के लिए एक बड़ा आर्थिक झटका साबित हो सकती है।
डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने इस पूरे मामले में यूपी-पीसीएल के प्रोजेक्ट मैनेजर से स्पष्टीकरण मांगा है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ दंड के लिए नहीं, बल्कि कार्य को समय पर पूरा कराने के उद्देश्य से की जा रही है।
जांच समिति में एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह, पीडब्ल्यूडी और विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा एसडीएम गोला शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में माना कि परियोजना में तेजी लाना अब बेहद जरूरी है।
प्रशासन का साफ संदेश है—आस्था से जुड़े इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गोला कॉरिडोर निर्माण पर डीएम की यह सख्ती आने वाले समय में अन्य परियोजनाओं के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है।
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