March 2, 2026

लखीमपुर खीरी के गोला डिपो में कर्मचारियों की सेहत को ध्यान में रखते हुए एक विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें डिपो से जुड़े कुल 122 कर्मचारियों—एआरएम, चालक, परिचालक, सफाई कर्मी, मिस्री सहित अन्य स्टाफ—की विभिन्न बीमारियों की स्क्रीनिंग की गई। सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता के अनुसार शिविर में एचआईवी, सिफीलिस, हेपेटाइटिस-बी (एचबीएसएजी), हेपेटाइटिस-सी (एचसीवी) और टीबी की जांच की गई, जिसमें हेपेटाइटिस-बी के 2 मामले और सिफीलिस का 1 मामला रिएक्टिव पाया गया, जबकि एचआईवी का कोई भी मामला पॉजिटिव नहीं निकला। टीबी की जांच के तहत 37 कर्मचारियों का एक्स-रे और 9 का स्पुटम परीक्षण कराया गया, साथ ही 80 लोगों की आंखों की जांच भी की गई। शिविर में मौजूद चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों ने कर्मचारियों को नियमित जांच के महत्व, बीमारियों की शुरुआती पहचान और समय पर उपचार के लाभों की जानकारी दी तथा किसी भी लक्षण पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेने की अपील की। शिविर में डॉ. सुधांशु त्रिपाठी, चित्रांशु समाज कल्याण परिषद, एचआईवी-टीबी कोऑर्डिनेटर, डीएसआरसी काउंसलर, पीपीटीसीटी जिला महिला अस्पताल, एनटीईपी स्टाफ और सीएचसी गोला का स्वास्थ्य अमला उपस्थित रहा।

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गोला डिपो में स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित, 122 कर्मचारियों की हुई विभिन्न बीमारियों की स्क्रीनिंग

लखीमपुर खीरी। गोला डिपो में एक विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में डिपो से जुड़े चालक कुल 122 लोगों की जांच की गई, जिसमें एआरएम, संचालक, परिचालक, सफाई कर्मी, मिस्री सहित अन्य कर्मचारी शामिल रहे।
सीएमओ डॉ संतोष गुप्ता ने बताया कि गोला डिपो (बस स्टैंड) पर स्वास्थ्य शिविर के दौरान एचआईवी, सिफीलिस, हेपेटाइटिस-बी (एचबीएसएजी), हेपेटाइटिस-सी (एचसीवी) तथा टीबी (क्षय रोग) की स्क्रीनिंग की गई। जांच रिपोर्ट के अनुसार हेपेटाइटिस-बी (एचबीएसएजी) के 2 मामले पाए गए, सिफीलिस का 1 मामला रिएक्टिव पाया गया, जबकि एचआईवी का कोई भी मामला रिएक्टिव नहीं मिला। टीबी की जांच के तहत 37 लोगों का एक्स-रे किया गया और 9 लोगों के स्पुटम (बलगम) की जांच कराई गई। इसके अलावा 80 लोगों की आंखों की जांच भी की गई।
शिविर में मौजूद चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों ने कर्मचारियों को जांचों के महत्व के बारे में जानकारी दी। बताया गया कि समय-समय पर एचआईवी, टीबी, हेपेटाइटिस और सिफीलिस जैसी बीमारियों की जांच कराने से रोग की पहचान प्रारंभिक अवस्था में हो जाती है, जिससे समय रहते उपचार संभव हो पाता है और गंभीर जटिलताओं से बचाव किया जा सकता है। टीबी की जांच में एक्स-रे और स्पुटम टेस्ट के माध्यम से रोग की पुष्टि की जाती है, जबकि एचआईवी और सिफीलिस की जांच रक्त परीक्षण से की जाती है।
स्वास्थ्य शिविर में डॉ. सुधांशु त्रिपाठी, चित्रांशु समाज कल्याण परिषद, एचआईवी-टीबी कोऑर्डिनेटर, डीएसआरसी काउंसलर, पीपीटीसीटी जिला महिला अस्पताल, एनटीईपी स्टाफ तथा सीएचसी गोला का स्वास्थ्य स्टाफ उपस्थित रहा। सभी ने कर्मचारियों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और किसी भी लक्षण के दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेने की अपील की।

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