लखीमपुर खीरी से राहत भरी खबर: डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल की पहल से दिवंगत श्रमिक पृथ्वीपाल के परिवार को 12.93 लाख की आर्थिक सहायता — प्रशासन बना मज़बूत सहारा
लखीमपुर खीरी, 06 दिसंबर।
गोविंद शुगर मिल ऐरा में 27 दिसंबर को हुई दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए संविदा श्रमिक पृथ्वीपाल की 13 जनवरी 2025 को उपचार के दौरान मृत्यु ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया था। लेकिन इस मुश्किल घड़ी में जिला प्रशासन, विशेषकर डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल की सक्रिय पहल परिवार के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई। प्रशासन के हस्तक्षेप और सतर्कता के परिणामस्वरूप पृथ्वीपाल के आश्रितों को कुल 12 लाख 93 हजार 900 रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है।
🔶 डीएम ने दिया सहारा, परिवार को सौंपा चेक व राहत सामग्री
शनिवार को डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने सहायक श्रमायुक्त मयंक सिंह के साथ प्रभावित परिवार को सहायता राशि का चेक सौंपा।
इस दौरान डीएम ने परिजनों को—
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₹12,93,900 का चेक
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सीएसआर राहत किट
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शाल
प्रदान कर प्रशासन की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का परिचय दिया।

डीएम ने कहा:
“श्रमिक परिवारों के अधिकारों की रक्षा और सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी मजदूर परिवार को न्याय और सहायता देने में देरी नहीं होनी चाहिए।”
उन्होंने मिल प्रबंधन को यह भी सख्त निर्देश दिए कि भविष्य में सुरक्षा मानकों को और कड़ा किया जाए, ताकि ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
🔶 कर्मकार क्षतिपूर्ति अधिनियम के तहत मिला मुआवज़ा
डीएम की पहल के बाद कर्मकार क्षतिपूर्ति अधिनियम 1923 के तहत मिल प्रबंधन द्वारा यह बड़ी राशि जारी की गई।
यह न सिर्फ कानूनी प्रक्रिया का पालन है, बल्कि प्रशासन की तेज़ी व संवेदनशीलता का भी प्रमाण है।
🔶 डीबीटी और एफडी से दी गई सुरक्षित आर्थिक संरचना
प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि परिवार को तत्काल राहत के साथ-साथ भविष्य की सुरक्षा भी मिले।
इस व्यवस्था के तहत—
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₹5,93,900 रुपये डीबीटी के माध्यम से सीधे खाते में भेजे गए
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₹7,00,000 रुपये की एफडी परिजनों के नाम से कराई गई, ताकि आने वाले समय में परिवार को आर्थिक स्थिरता मिल सके
🔶 संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का मिसाल
यह पूरा प्रकरण जिला प्रशासन द्वारा श्रमिकों और उनके परिवारों के प्रति निभाई जा रही संवेदनशीलता का उदाहरण है। डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल के हस्तक्षेप से न सिर्फ परिवार को आर्थिक सहायता मिली, बल्कि प्रशासन ने यह भी संदेश दिया कि—
“किसी श्रमिक परिवार को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।”
कुल मिलाकर, पृथ्वीपाल के परिवार को मिली यह आर्थिक सहायता न सिर्फ राहत है, बल्कि प्रशासन के मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण की एक मजबूत मिसाल भी है।
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