March 2, 2026

सीएमओ कार्यालय सभागार में टीबी-एचआईवी कोऑर्डिनेशन बैठक संपन्न, समन्वय से ही संभव है टीबी उन्मूलन का लक्ष्य 🩺✨

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सीएमओ कार्यालय सभागार में टीबी-एचआईवी कोऑर्डिनेशन बैठक संपन्न, समन्वय से ही संभव है टीबी उन्मूलन का लक्ष्य 🩺✨

लखीमपुर खीरी। जिले में टीबी उन्मूलन और एचआईवी नियंत्रण को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मंगलवार को सीएमओ कार्यालय सभागार में टीबी-एचआईवी कोऑर्डिनेशन बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता ने की, जबकि राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. प्रमोद रावत विशेष रूप से उपस्थित रहे।

बैठक में टीबी और एचआईवी दोनों कार्यक्रमों के बीच बेहतर तालमेल, साझा रणनीति और समन्वित कार्यप्रणाली पर विस्तार से चर्चा की गई। सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता ने कहा कि टीबी और एचआईवी दोनों ही गंभीर व संक्रामक रोग हैं, जिनका समय पर पता लगाना और एक-दूसरे से जुड़े जोखिमों को समझते हुए इलाज करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों में टीबी होने की आशंका सामान्य लोगों की तुलना में अधिक रहती है, ऐसे में दोनों कार्यक्रमों के बीच मजबूत कोऑर्डिनेशन से रोगियों को समय पर जांच, उपचार और परामर्श उपलब्ध कराया जा सकता है।

सीएमओ ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले की सभी स्वास्थ्य इकाइयों पर

  • टीबी मरीजों की एचआईवी जांच

  • एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की टीबी स्क्रीनिंग

  • समयबद्ध काउंसलिंग, दवा वितरण और नियमित फॉलो-अप
    को अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही टीबी उन्मूलन के लक्ष्य में बाधा बन सकती है, इसलिए सभी विभागीय अधिकारी और कर्मचारी जिम्मेदारी व संवेदनशीलता के साथ कार्य करें।

इस अवसर पर नोडल अधिकारी डॉ. प्रमोद रावत ने टीबी-एचआईवी कोऑर्डिनेशन की विस्तृत कार्ययोजना, जमीनी स्तर पर किए जा रहे प्रयासों, उपलब्ध संसाधनों और आगे की रणनीति की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि बेहतर समन्वय से न केवल मरीजों की पहचान और इलाज में तेजी आएगी, बल्कि टीबी के प्रसार को भी प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा।

बैठक में मौजूद सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से टीबी मुक्त जिला बनाने के लक्ष्य को लेकर आपसी सहयोग और समन्वय के साथ कार्य करने का आह्वान किया गया। यह बैठक जिले में टीबी मुक्त अभियान को नई गति देने और एचआईवी से प्रभावित मरीजों को बेहतर, सुलभ और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

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